Monday, October 24, 2016

तेरी ख़ामोशी ने तोड़ दिया

शिकायतें तो बहुत है तुझसे,
पर तुझसे गीले शिकवे करना मेरी आदत नहीं
व्यापार किया होता तो बही खता ले के बैठ जाता ,
मोहबत में कँहा नफे नुकसान का हिसाब होता है

मोहबत में तेरी रुस्वाई भी कबूल थी
बस इतना कह देती मैं तेरी नहीं
मैं तुझसे सुनना चाहता था तू क्या चाहती है
खामोश रह कर तूने सब जाहिर कर दिया
मुझे तेरी रुस्वाई से ज्यादा तेरी ख़ामोशी ने तोड़ दिया

No comments: