Tuesday, February 25, 2014

इश्क़ का इत्र

मेरी आँखे आप के सिवा और किसी पे टिकती नहीं
मेरा दिल आप के सिवा किसी और के लिए धड़कता नहीं
ऐसे मैं कभी कोई खता नहीं करता
पर आपसे मोह्बत करने कि खता जाने क्यूँ मैं बार बार करता हूँ
मुझे खुद नहीं पता आपसे इतनी मोह्बत कब और कैसे हो गयी
अब हालात ये है कि मुझ पे मेरा खुद का बस नहीं चलता है
पहले सिर्फ इश्क़ था अब ये इश्क़-ऐ-जूनून का रुख अख्तियार कर चूका है
जुनून जरुर है पर सही गलत कि पहचान है इसे
मदहोश हूँ आप के इश्क़ में बेहोश नहीं
इस मदहोशी में भी आप से कुछ वादा कर रहा हूँ
ये इश्क़-ऐ-जूनून कायम रहेगा हमेशा हमेशा के लिए
आप कि ज़िंदगी महका करेगी इस इश्क़ के इत्र से

Sunday, February 23, 2014

दो पल आप कि मोह्बत के

आप से इतनी मोह्बत है फिर भी आप कि मोह्बत से महरूम हूँ मैं
कोई खता हुई है मुझ से या फिर मेरी तक़दीर में ही रुस्वाई लिखी है
जी जलता है जब भी आप को पास से गुज़रते देखता हूँ पर बातें नहीं कर पता हूँ
कितना कुछ है आप से कहने के लिए पर आप के पास वो सुन ने का वक़्त नहीं
ये हालात ही ऐसे है या फिर कुछ और बात है
आप के लिए ये पल शायद कोई कीमत नहीं रखते है
पर मेरे लिए तो ये मेरे जीने मरने के बराबर है
आप के लिए जो दिल में सम्भाले रखा है अब तक
एक दफा केह दू आप से तो शायद मुझे भी कुछ सुकून मिले
ये जो तड़प है ये जो मेरी बेबसी है इस मर्ज़ कि कोई दवा निकले
आज भी आप से ज्यादा कुछ मांग नहीं रहा हूँ
बस आप कि मोह्बत से बेसहारा हो के भटक रहा हूँ
दो पल आप कि मोह्बत के मिले जाये तो मेरा भी कुछ ठौर ठिकाना निकले

Sunday, February 16, 2014

आप सिर्फ और सिर्फ इश्क़ के लिए बनी है

पता नहीं मैं सही हूँ या गलत दीवाना हूँ कि नासमझ
जो भी हूँ बस आज आप से अपने दिल कि बात कहना चाहता हूँ
आप को पहेली बार देखते ही आप से इश्क़ हो गया था
आप को चोरी छुपे देखना आप से बात करने के बहाने ढूँढ़ना
मेरी आदतों में शुमार हो गया था
आज भी इन आदतों का सिलसिला बादस्तूर जारी है
इन सिलसिलो के चलते कुछ अरमान भी जुड़ गए है आप से
आप को एक बार गले लगाना चाहता हूँ
आप को एक बार छूना चाहता हूँ
आप को अपने दिल कि धड़कन सुनाना चाहता हूँ
कुछ आप के दिल कि धड़कन सुनना चाहता हूँ
आप का हाथ अपने हाथो में लेकर कहना चाहता हूँ
आप से मोह्बत है बेइंतेहा मोह्बत
आप को अपने साथ मोह्बत कि एक नयी उच्चाई पे ले जाना चाहता हूँ
आप को एक एहसास दिलाना चाहता हूँ कि आप सिर्फ और सिर्फ इश्क़ के लिए बनी है

Thursday, January 30, 2014

मैं जहाँ था वही रह गया

मैं जहाँ था वही रह गया तुमसे आगे बढ़ नहीं पाया
यूँ तो तुमसे आगे बढ़ना नामुमकिन नहीं था
पर मोह्बत में बेईमानी करना मेरी फितरत में नहीं था

Monday, January 27, 2014

आप के कहे दो शब्द चिता में जलते हुए या कबर में दफ़न होते हुए सुकून के दो पल दे जाये

आप से कभी कुछ माँगा नहीं आप से कभी कुछ चाहा नहीं
जो भी किया आप से आप के लिए पुरे दिल पुरे मन से किया
पूरी शिदत से आप से मोहबत कि
कभी ये जानने कि भी कोशिश नहीं कि कि आप क्या सोचती है मेरे बारें में मेरी मोहबत के बारें
हमेशा अपने दिल का पूरा हाल आप को बयान करता रहा
आप के प्रति मोह्बत को धर्म कि तरह ही निभाया हमेशा
कभी कोई खुदगर्जी का ख्याल नहीं आने दिया
आप कि ख़ुशी आप कि हंसी को सर्वपरि माना खुद के लिए
पर आज दिल में ये ख्याल आया आप से अपने बारें कुछ जानने का
हो सके और जायज़ लगे तो बता दीजिये कहीं मेरा नाम सिमटा सा दबा सा है क्या आप के दिल में
कभी मेरी मोह्बत के गुलशन के किसी गुलाब कि खुशबू ने छूआ है क्या आप को
मेरी इस बेनाम मोह्बत का जरा भी इल्म एहसास है क्या आप को
बहुत ज्यादा तो कोई उम्मीद नहीं लगाये बैठा हूँ बस हो सकता है
बस आप के होठो से दो शब्द सुन ना चाहता हूँ हो सकता है
आप के कहे दो शब्द चिता में जलते हुए या कबर में दफ़न होते हुए
सुकून के दो पल दे जाये
और मेरी ज़िन्दगी कि सार्थकता को एक नया आयाम मिल जाये

मेरी हर सोच हर कल्पनाओ का अस्तित्व तुम हो

तुम हो ये मेरी एक सोच है मेरी एक कल्पना है
तुम्हारे संग रहता हूँ
बातें करता हूँ हँसता खेलता हूँ
हरदम तुम्हारी फ़िक्र करता हूँ
अपने दिल कि हर बात तुम से साझा करता हूँ
तुम ही हो जिस कि वजह से मैं कभी अकेला नहीं होता
लोग मुझे देख तरह तरह कि बातें करते है
कुछ तो पागल भी कह देते है
शायद सच भी हो ये बातें जो मैं पागलपन में तुम्हारी कल्पनाएँ करता हूँ
पर ये भी तो एक सच्चाई है हर कल्पनाओं का कोई अस्तित्व होता है
और मेरी हर सोच हर कल्पनाओ का अस्तित्व तुम हो

Tuesday, January 21, 2014

हम फिर जनम लेंगे सिर्फ एक दूसरे के लिए मोहबत के बंधन को निभा ने के लिए

समझते थे हम दोनों इस कदर एक दूसरे को कि
मुझको तुमसे तुमको मुझसे शिकायतें ना थी अपेक्षायें ना थी
कभी मुझको तुमसे तुमको मुझसे कोई गीले शिकवे ना रहे
तुम्हारी किसी बातों का मैंने कभी बुरा माना नहीं
मेरी किसी बातों का बुरा तुमने कभी माना नहीं
सालों साल हो गए मेरे और तुम्हारे रिश्ते को कभी हमारे बीच कोई दुरी नहीं आई
समय के बीतने के साथ मेरी और तुम्हारी मोह्बत में और भी गहराई आती गयी
निशचल प्रेम मेरा तुम्हारे लिए तुम्हारा मेरे लिए निरंतर बढ़ता रहा
मैं तुम्हारे साथ परस्पर हूँ कि नहीं तुम मेरे साथ परस्पर हो कि नहीं
अब इनके कोई मायने नहीं रेह गए थे मेरे और तुम्हारे बीच
अटल सत्य तुम भी जानती थी मैं भी जनता था
हम दोनों के दिलो में एक दूसरे का स्थान और कोई ले नहीं सकता
एक होने के मायने हमारे लिए अलग थे
ये जीवन हमने अपने अपने कर्त्तव्य निर्वाह के लिए समर्पित कर दिया था
हम फिर जनम लेंगे सिर्फ एक दूसरे के लिए मोहबत के बंधन को निभा ने के लिए