Wednesday, December 19, 2012

आप भी सोचो कोई मेरा है मेरा मेरे देश में

आप विदेश में है और मैं देश में ,जाने मेरे कितने कीमती पल बीत गए गए आप से दुरी के आवेग में
मन से हमेशा आप के समीप रहा फिर भी न जाने किस बात का राग है मेरे मन में
ये आवेग ये राग आप से नहीं है ये तो मोह्बत का एक रूप है आप के लिए मेरे ह्रदय में
ये ह्रदय कभी आप से जुदा होना नहीं चाहता है ये नादान समझता नहीं हर चीज़ नहीं है इस के बस में
अब वो समय निकट है जब मैंने और आप मिलेंगे फलक के एक नए आशियाने में
अब तो देश की मिटटी और बयार ( हवा ) भी मस्त है मुझे आप के आने का पैगाम देने में
मुझे भी इंतज़ार है अब आप की महक का मेरी साँसों में
मैंने भी व्यस्त हूँ बादलो के ऊपर से आती आप के कदमो की आवाज़ को सुनने में
जो सोच मेरी है दुआ है वोही सोच आप की हो आप भी सोचो कोई मेरा है मेरा मेरे देश में

Monday, December 3, 2012

मन का सफ़र

चलती ट्रेन की खिड़की से झाँक कर देखा तो सब कुछ पीछे छुटता नजर आया,
जिन फासलो को तय करने के लिए सफ़र शुरू किया था,
उन मंजिलो से मिल नई मंजिल के लिए फिर निकल आया,
पीछे छूटते मंज़रो को देख ख्याल आया ऐसे ही बीती ज़िन्दगी भी छुट जाये तो क्या हो,
पर बीती जिंदगी तो मन के सफ़र का हिस्सा होता है जो छूटे नहीं छुटता,
न जाने मन मन ही मन में कितनो से मिलता है कितनो से बिछड़ता है,
मन का सफ़र काटे नहीं कटता, इस सफ़र का कोई अंत नहीं इसकी कोई मंजिल नहीं,
यह भटकता रहता है इसकी कोई सीमा परिसीमा नहीं,
ये कहीं भी आते जाता रहता है भूत वर्तमान भविष्य कहीं भी
मैं भी विवश हूँ इसके आगे न चाहते हुए भी इस सफ़र का मुसाफिर बन जाता हूँ,
मैं थक जाता हु पर ये मन का सफ़र चलता रहता है
मैं कहीं थम भी जाऊ पर ये कहीं थमने का नाम नहीं लेता

Saturday, December 1, 2012

ऐसे तो कभी तुझे से जुदा हुआ नहीं

मुझे भी कभी लगता है जाने कब से तुझे से मिला नहीं
फिर मेरा दिल मुझे से कहता है ये जो मेरे अंदर हमेशा रहता है उस का क्या
नज़रें कहती ये जो हर वक़्त उस को ही देखती है उस का क्या
साँसे कहती हर सांस में उस की महक है उस का क्या
फिर लगता है फिर कहने के लिए ही तुझे से नहीं मिला
ऐसे तो कभी तुझे से जुदा हुआ नहीं

Wednesday, November 28, 2012

तेरा लिखा वोही एक शब्द

तेरे इतना कहने से मैंने फिर जिंदा हो गया
जाने कितनी बार तेरा लिखा वोही एक शब्द पढता रहा
जितनी बार पड़ा हर बार लगा जैसे एक नयी सांस मिल गयी हो मुझे
एक नयी शक्ति का जैसे संचार हुआ पुरे शरीर में
तेरे लिखे एक शब्द से ये हाल है सोचता हूँ जिस दिन तेरा पूरा कलाम आएगा
उस दिन तो पूरी दुनिया मेरे कदमो में होगी और ये आसमान मेरे आगे शीश नवाए खड़ा होगा
इस ब्रम्हांड के पुरे फलक पे बस तेरे और मेरे नाम का कीर्तिमान होगा

शब्द

मैंने खुद नहीं जनता ये शब्द कहाँ से आ जाते है
जब भी तुझे सोचता हूँ जब भी कभी तुझे से कुछ कहना चाहता हूँ
परस्पर दिल से निकल आते है सायद और बहुत कुछ है तुझ से कहने के लिए
आप खुश हो जाती हो ये पड़ कर इस से बड़ी तसली मेरे लिए और क्या हो सकती है
जब से आप को देखा था कोशिश भी तो यही की थी की हमेशा आप को खुश रख सकू
मैंने तो हमेशा बस आप की एक मुस्कराहट का दीवाना था
आज दूर हो कर आप कैसी हंसती होंगी यही सोच मेरी दीवानगी फिर बढ जाती है

थाह और अथाह

आप से जितनी मोहब्त है उस को नापने का पैमाना अभी तक मुझे मिल नहीं पाया है
या फिर ये भी कह सकता हूँ की मैंने खोजने की कोशिश ही नहीं की
क्यूँ की इस सत्य से मैं बखूबी वाकिफ था की
जिस मोहबत की थाह मिल जाये वो मोहबत तो मैं जनता नहीं
मैंने तो हमेशा आप से अथाह मोहबत की है।

Tuesday, November 27, 2012

कुछ पन्तियाँ

तुझसे मोहब्त ही नहीं की थी
अब मैं तुझे अपनी ज़िन्दगी मान चला था
तेरा इस कदर मेरी ज़िन्दगी से रूठ कर चले जाना
मुझे बेचैन कर रहा रहा है


तुझ से गले लग ने का एहसास आज भी है
तेरे लबो की मिठास का स्वाद आज भी मेरे लबो पे है
तुझ से दुरी कितनी भी सही
तुझ से मोहबत बरक़रार आज भी है