Saturday, September 13, 2014

मासूम मोह्बत

अब भी सर्द मौसम की सुबह में उसी मासूम मोह्बत के साथ खिड़की के कांच पे जमी ओस पे तुम्हारा और मेरा नाम लिखा करता हूँ
आज भी सुबह की चाय में अदरक की सुगंध के साथ तुम्हारे हाथो की महक आती है
तुम्हारे पसंदीदा गानो की प्लेलिस्ट भी बना ली है अक्सर सुनता हूँ ऑफिस से आने के बाद
लगता है जैसे तन्हाई में पास आ कर के तुम कानो में मेरे गुनगुना रही हो
कहने को मेरे घर की हर दीवार कोरी है पर मेरी आँखों से देखो तो हर दीवार पे सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी तस्वीर है
मेरी और तुम्हारी प्रेम कहानी के अनोखे किस्से कहानियाँ भी लिखी हुई है जो सिर्फ मैं पढ़ता हूँ
पहाड़ो से बहते झरनो को देख तुम्हारे कानो के झुमके याद आते है
रात के अँधेरे में पुरे चाँद को देखता हूँ तो तुम्हारे माथे की बिंदी याद आती है
तुम्हारी एक चुनरी चुपके से चुरा ली थी आज भी तकिये में रख के सोता हूँ
जानता हूँ दुनिया की नज़र में ये सब पागलपन है पर किसी को कैसे समझाऊ की
तुम्हे पाना खोना मेरे हाथ में नहीं था पर तुमसे बेइंतेहा मोह्बत करना मैंने अपना धर्म मान लिया था
और उसी मासूम मोह्बत के साथ अब मैं सिर्फ अपने धर्म का पालन कर रहा हूँ

Thursday, September 11, 2014

वक़्त

मेरी साँसे मेरी धड़कन अब मुझसे बेवफाई करने लगी है
शायद इन्हें मेरे और तुम्हारे बीच बढ़ते फासलो का एहसास होने लगा है
​वजह तो शायद न मैं दे सकूँ न तुम्हारे पास कोई वजह है
​बस यही कह सकते है अभी वक़्त सही नहीं है मेरे और तुम्हारे रिश्ते के लिए
ये वक्त इम्तिहान ले रहा है मेरे लिए तुम्हारी मोह्बत का और तुम्हारे लिए मेरी मोह्बत का
मन में शंका कुशंका का दौर चल रहा है ​
पर इस सब विचारो के द्वंदों के बीच भी एक अटल विश्वास कायम है
हमारी मोह्बत वक्त की सारी कसौटीयो पर खरा उतरेगा
और दुनिया में मोह्बत की एक नयी मिसाल देगी

Wednesday, August 13, 2014

बहुत कुछ अधूरी ख्वाहिशें है बहुत सी अधूरी हसरतें

चलो आज तुम्हें अपने दिल की बात बता ही देते है , हम एक बार फिर जन्म लेना चाहते है इस धरती पे
बहुत कुछ अधूरी ख्वाहिशें है बहुत सी अधूरी हसरतें है जो इस ज़िन्दगी में पूरी कर नहीं पाये है
बस वो ही अधूरापन पूरा करना है अगले जन्म में
अब आप पूछेंगी की क्या है वो ख्वाहिशें हसरतें तो आप को बता दे सब आप से जुडी हुई है
आप को जेहन में रख कर बहुत कुछ सोचा है जो पूरा करना है
आप के बालो में सबसे खूबसूरत गुलाब का फूल लगाना है ,मोगरे के फूल का गजरा सजाना है
आप के हाथो में कांच के कंगन पहनाने है , पैरो में चाँदी की पायल पहनानी है
बनारस हरिद्वार में आप के साथ गंगा माँ की आरती करनी है देखनी है
भारत के हर मंदिर की सीढ़ियां आप को अपनी गोद में ले कर चढ़नी है
माँ वैष्णो देवी के चरणो के सिंदूर से आप की मांग भरणी है
हर पूजा में आप के साथ जोड़े में बैठना है
सागर की शांत लहरो के बीच आप का हाथ अपने हाथो में लेकर का बैठना है
दूर किसी पहाड़ की तलहटी में एक छोटा सा आशियाना बसाना है आप के साथ
आप के लिए बहुत ही शायरी ग़ज़ल लिखनी है
कुछ किस्से कहानिया आप को सुननी कुछ किस्से कहानियाँ आप से सुननी है
इंद्रधनुष के छोर तक जाना है , चाँद तक जाने के लिए सीढ़ियां बनानी है
अब आप ही बताओ इतना सब करने के लिए आप से पूरी मोहबत करने के लिए ये जन्म काफी है क्या
बस इस लिए फिर एक बार जन्म लेना चाहता हूँ ताकि की आप से पूरी मोह्बत कर सकू
दुनिया जिस इश्क़ की मिसाल दे सके वो मोह्बत की रूहानी आयतें लिख सकु

Thursday, August 7, 2014

स्कार्फ वाली लड़की

" सच कहूँ तो मुझे आप से प्यार तब ही हो गया था जब आप स्कार्फ बांधे हुए स्कूटी पे पीछे बैठी हुयी रोज़ हमारे सामने से गुज़रती थी , शेख भाई टी टपरी पे बैठ के सामने से जाते हुए देखता था। तभी लगा था ये लड़की सबसे अलग है. इस लड़की में कुछ बात है । कितना अजीब दीवाना था सोचता था कुछ भी कर के बस स्कार्फ चुरा लू आप का , बस इसलिए की आप की महक को महसूस कर सकू , उस स्कार्फ को छू के अपने हाथो को आप का एहसास दिल सकू ।

आप को देख देख के सोचा करता था ये लड़की का नाम क्या होगा , इस की आवाज़ कैसी होगी। इस से बात करूँगा तो कैसा लगेगा , क्या बात करूँगा । न जाने कितने दिन लगा दिए इसी सोच में । फिर पता किया तो आप हमारी ही क्लास में दिख गयी । फिर सोचा अब तो काम बन ही जायेगा और कुछ भी कर के आप से बात जरूर कर लेंगे |

बस फिर क्या था रोज़ नए बहाने खोजे जाने लगे और फिर वो दिन भी आ गया जब आप से पहेली बार बात हुई ।
हाय कितनी प्यारी आवाज़ थी ,कितनी हया थी बातों में जैसा सोचा था उस से भी बढ़कर थी आवाज़
आज भी उसी आवाज़ की मदहोशी में डूबा हुआ हूँ ।

बस फिर भी एक आखिरी तमना है आप के उस स्कार्फ को छू लू ,उस की खुशबु मैं सांस ले सकु | "

Monday, August 4, 2014

एक सुहानी शाम की बातें

आज पता नहीं अचानक आप के मेहँदी लगे हाथ उस में पहनी हुई लाल अंगूठी याद आ गयी
आप को शायद याद हो गया हमारे जन्मदिन पर उन्ही हाथो से आपने हमे चॉकलेट खिलाई थी
I still feel nostalgic for those moments.

पता नहीं कब आप से इतनी मोह्बत हो गयी। कभी कभी तो सारे पहर आप को सोचते रहते है। कुछ भी टीवी में देखते है तो सोचते है आप इस ड्रेस में कैसी लगेगी। काश की आप हमारे पास होती हम अपने हाथो से आप को ऐसे तैयार करते है
और भी बहुत कुछ आते जाते रहता है दिमाग में ...You are a integrated part of me & my Life....

Because of You I got to understand the true meaning of platonic Love. लगता है मैं एक भटकता हुआ आवारा दरिया हूँ जिसे को आपने एक साहिल दे दिया

आप की वो हंसी की आवाज़ अकसर मेरे कानो में गूंजती रहती है।
​कभी ​
कभी तो नींद से उठ कर देखता हूँ कहीं आप आस पास तो नहीं

कभी सोचता हूँ कितना अच्छा होता फिर से कॉलेज में होते साथ साथ पढ़ते। मैं फिर किसी बहाने से आप से बातें कर लेता। आप से ही आप की कुछ आवाज़ें चुरा लेता और सहेज कर अपने पास रख लेता

इतना कुछ है आप से कहने के लिए बोलने के लिए बताने के लिए। पर जाने क्यूँ आप जब भी सामने आती जैसे गले में ही रुक जाता है , शब्द ही नहीं सूझते है हमे ,पेट में दिल में गुदगुदी सी होने लगती है

आप को देख कर फिर यकीन हो जाता है ये मेरी ज़िन्दगी आप से ही है और आप के लिए ही है…

Tuesday, May 20, 2014

अकस्मात

अकस्मात ही हुई थी मेरी और तुम्हारी मुलाक़ात
जो एक सिलसिले में बदल गयी
सिलसिला भी ऐसा की ज़िन्दगी का एक अहम हिस्सा बन गया
हर हिस्सा एक कहानी सा लगता है
जिस को अपने मानसपटल में बार बार देखता हूँ
ये कोशिश बेवज़ह नहीं है , ये एक मौका दे जाती है वर्तमान में
तुम्हारे साथ गुज़रे लम्हो को फिर से जीने लेने का
इस तपती जीवन की धुप में तुम्हारा ओस जैसा एहसास फिर से महसूस करने का
जीवन के कड़वे अनुभव के साथ गुलकंद जैसी तुम्हारी बातों की मिठास का स्वाद लेने का
आज के इस तकनीकी प्यार के दौर में रूहानी मोह्बत के अस्तित्व में होने का
इस भटकाव इस अकेलेपन में तुम्हारे निरंतर साथ होने का

Thursday, April 10, 2014

रात का शायर

"एक अंजुल ​भर पानी पिला कर वो मुझे ज़िन्दगी भर के लिए प्यासा छोड़ गए
पानी पिलाना उनकी मोह्बत थी और सारी ज़िन्दगी प्यासा रेह जाना हमारी मोह्बत "

"बात बस इतनी सी थी ,आप हमारे उन चंद ख्वाबो में से एक थे जो मुकम्मल नहीं हुए "

" मेरी और तुम्हारी मोह्बत का बुनियादी फर्क बस इतना था
मेरी मोह्बत में मेरी दुनिया तुम थी और
तुम्हारी मोहबत में तुम्हारी दुनिया में मेरे लिए कोई जगह नहीं थी
बस यही एक वजह है मेरी मोह्बत मेरी ज़िंदगी मेरे सपने मेरी कहानी
सब अधूरा गया "

" ना आप हमारी मोह्बत कि मोहताज़ है, ना हम आप कि मोह्बत के मोहताज़ है
हम तो बस आप कि हंसी के रसगुल्लो कि मिठास के दीवाने है "