Sunday, March 10, 2013

aap ke liye

वो कहती है कुछ जज़्बात कहे नहीं जाते
और हम ये मानते है सच्ची मोहबत से भरे जज्बात दिल ही दिल में रखे नहीं जाते
वो भी अपनी जगह सही है और हम भी
वो पृथ्वी का रूप हर बात अपने गर्भ में रखे हुए
और हम बादल पृथ्वी की तड़प देख बिना बरसे रह नहीं सकते

Friday, March 1, 2013

आप के लिए

कुछ बेकरारी इधर भी है, कुछ बेकरारी उधर भी है,
एक दुसरे से मिलने की चाहत दिल में लिए सुग्बुआहत इधर भी है, उधर भी है
इश्क के कई नए आयाम अभी पार करने है,यही हसरत लिए,
एक दीवाना इधर भी है, एक दीवानी उधर भी है

Monday, February 18, 2013

तुम को हँसता मुस्कुराता देख शायद मैं कुछ राहत महसूस कर सकू

कल अचानक तुम्हारी आप बीती का एहसास हुआ
तुम जिस प्रताड़ना से गुजरी
उस का कुछ रति भर दुःख मैंने महसूस किया
बहुत स्वार्थी था मैं जो तुम से अलग हो के सिर्फ अपने बारें में ही सोचता रहा
कभी तुम्हारे दृष्टिकोण से उस चीज़ को नहीं दिख पाया
मुझे तो सिर्फ तुम से जुदा होने का गम रहा
पर तुम ने जो सहा तुम जिस दौर से गुज़री
अपनी आंधी मोह्बत की सड़को पर दौड़ते दौड़ते कभी उस जगह ठहर नहीं पाया
कहने को तुम्हारे बैगर बुरा समय मैंने भी देखा
पर वो तुम्हारे बुरे समय के आगे न के बराबर थे
तुम अगर नरक में जल रही थी तो मैं नरक के द्वार पर खड़ा था
यूँ तो ये मेरी इक तरफा मोहबत है पर मोहबत के उसूल जिस में सब से पहले तुम्हारी ख़ुशी आती है
उस उसूल में बंधा हुआ हूँ मैं , बस उसी मोहबत के वास्ते तुम से ये कहना ये चाहता हूँ
तुम्हारी एक हंसी के लिए आज भी दुआए होती है
हो सके तो पुराना समय भूल के खिलखिला के मुस्कुरा दो
तुम को हँसता मुस्कुराता देख शायद मैं कुछ राहत महसूस कर सकू

Monday, February 11, 2013

तुम मिलोगी तो ये देखो गी कैसे तुम्हारी आस पे ये बुत कायम है

अब जो की तुम नहीं हो मेरी ज़िन्दगी में
मुझ को मेरे अन्दर का इंसान भी गुमशुदा सा लगता है
जिसे ढूँढ ने की कोशिश में में न चाहते हुए भी हर उस महफ़िल का हिस्सा बन जाता हूँ
जिस की बातो का मुझ से दूर दूर तक कोई सरोकार नहीं
सब हसंते खिखिलाते है मैं भी बुत बने रहता हूँ
महफ़िल में सब अपना दोस्त समझते है मुझ को पर कोई इंसान नहीं समझता
रोज़ खुद से कई सारे सवाल करता हूँ की क्यूँ हूँ मैं इन महफ़िलो का हिस्सा
पर कोई जवाब नहीं मिलता
मैं भी शायद इस आस पे महफ़िलो में चला जाता हूँ
की कहीं किसी महफ़िल में तुम नज़र आ जाओ
तुम्हारी नज़रो की संजीवनी मुझ को मिल जाये
और फिर ये बुत एक जिंदा इंसान में बदल जाये
कहते है आस पे दुनिया कायम है
तुम मिलोगी तो ये देखो गी कैसे तुम्हारी आस पे ये बुत कायम है

Tuesday, January 15, 2013

तेरी एक हलकी सी मुस्कुराहट

तेरी एक हलकी सी मुस्कुराहट ने ज़िन्दगी के न जाने कितने सफ़र आसान कर दिए
तुम मुस्कुराते रहे और हम ज़िन्दगी में नयी ऊंचाई छूते रहे
सब पूछते है की किस का साया है हमारी कामयाबी के पीछे
और हम हर बार बस तुम्हारी वोही मुस्कराहट अपने हूठो पे लाते रहे

Wednesday, December 19, 2012

आप भी सोचो कोई मेरा है मेरा मेरे देश में

आप विदेश में है और मैं देश में ,जाने मेरे कितने कीमती पल बीत गए गए आप से दुरी के आवेग में
मन से हमेशा आप के समीप रहा फिर भी न जाने किस बात का राग है मेरे मन में
ये आवेग ये राग आप से नहीं है ये तो मोह्बत का एक रूप है आप के लिए मेरे ह्रदय में
ये ह्रदय कभी आप से जुदा होना नहीं चाहता है ये नादान समझता नहीं हर चीज़ नहीं है इस के बस में
अब वो समय निकट है जब मैंने और आप मिलेंगे फलक के एक नए आशियाने में
अब तो देश की मिटटी और बयार ( हवा ) भी मस्त है मुझे आप के आने का पैगाम देने में
मुझे भी इंतज़ार है अब आप की महक का मेरी साँसों में
मैंने भी व्यस्त हूँ बादलो के ऊपर से आती आप के कदमो की आवाज़ को सुनने में
जो सोच मेरी है दुआ है वोही सोच आप की हो आप भी सोचो कोई मेरा है मेरा मेरे देश में

Monday, December 3, 2012

मन का सफ़र

चलती ट्रेन की खिड़की से झाँक कर देखा तो सब कुछ पीछे छुटता नजर आया,
जिन फासलो को तय करने के लिए सफ़र शुरू किया था,
उन मंजिलो से मिल नई मंजिल के लिए फिर निकल आया,
पीछे छूटते मंज़रो को देख ख्याल आया ऐसे ही बीती ज़िन्दगी भी छुट जाये तो क्या हो,
पर बीती जिंदगी तो मन के सफ़र का हिस्सा होता है जो छूटे नहीं छुटता,
न जाने मन मन ही मन में कितनो से मिलता है कितनो से बिछड़ता है,
मन का सफ़र काटे नहीं कटता, इस सफ़र का कोई अंत नहीं इसकी कोई मंजिल नहीं,
यह भटकता रहता है इसकी कोई सीमा परिसीमा नहीं,
ये कहीं भी आते जाता रहता है भूत वर्तमान भविष्य कहीं भी
मैं भी विवश हूँ इसके आगे न चाहते हुए भी इस सफ़र का मुसाफिर बन जाता हूँ,
मैं थक जाता हु पर ये मन का सफ़र चलता रहता है
मैं कहीं थम भी जाऊ पर ये कहीं थमने का नाम नहीं लेता