Sunday, January 29, 2012

काश कि कुछ पलों

काश कि कुछ पलों के लिए मेरा दिल तेरे सीने में धड़क सके,
कैसे जी रहा हूँ तेरे बिना अब तक इस दर्द को तुझे समझा सकूं,
ये चाहत नहीं कि तुझे दर्द में तड़पते हुए देखूं,
बस इतनी सी आरज़ू है कि तुझे मेरी तकलीफ से रूबरू करा सकूं...

तेरे जाने के बाद

मेरी ज़िन्दगी से तेरे चले जाने के बाद लोग मुझसे मेरा हाल पूछते हैं,
क्या कहूँ किस हाल में हूँ,
लगता है जैसे किसी गहरे पानी के सागर में डूब रहा हूँ,
और हर एक सांस के लिए मौत से लड़ रहा हूँ,
खून लगता है जैसे मेरी नसों में ही जम गया है,
दिल हर धड़कन पर कहता है कि अब थक गया हूँ उसके बिना धड़कते-धड़कते,
हालात ये हैं कि मेरे जज़्बातों ने मेरे अल्फाज़ को खामोशी दे दी है,
और लोग मुझसे पूछते हैं मेरा हाल तेरे जाने के बाद।

जिसे ढूंढता हूँ,

बहुत शोर है यहाँ कहीं गुम हुई है मेरी आवाज़,
जिसे ढूंढता हूँ,
कुछ सपने हैं टूट के बिचारे हुए,
फिर से जोड़ सकूं वो सपनों के टुकड़े ढूंढता हूँ,
कुछ दोस्त हैं पीछे छूटे हुए,
उनसे फिर मिल सकूं वो कड़ी ढूंढता हूँ,
ऊँची ऊँची सीमेंट की इमारतों में
कहीं दबा हुआ मेरा एक पुराना मिट्टी का घर है,
जिसे ढूंढता हूँ,
दुनिया की भीड़ में खोया है मेरा वजूद,
खुद की पहचान खुद से कर सकूँ,
वो खुद को ढूंढता हूँ...

Wednesday, January 25, 2012

उनसे मोहब्बत

उनसे मोहब्बत का इज़हार किए ज़माने हो गए,
और बिछड़े हुए भी मुदत्तें हो गईं,
फिर भी रोज़ ख्वाबों में आकर कहती हैं मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ।
हम भी दीवाने हैं,
उनके ख्वाबों को हक़ीकत समझ अपनी ज़िंदगी तनहा गुज़ार दी।

Sunday, January 1, 2012

तलाश

वो कहती है मुझसे अपने लिए कोई अच्छी लड़की ढूंढ लो,
मैंने कहा ढूंढ तो लेता लेकिन,
मैं हर लड़की में उन्हें ही तलाश करता हूँ,
और ऊपरवाले ने वैसी एक ही बनाई है...

Tuesday, December 27, 2011

हर नाम में उनका नाम सुनाई देता है

आज फिर मेरी मोहब्बत के इम्तिहान का दिन आया है,
उनहोंने मुझे उनके नाम से बुलाने को कहा है,
कैसे बताऊँ मेरी उलझन उन्हें,
किस नाम से पुकारूँ उन्हें,
मुझे तो हर नाम में उनका नाम सुनाई देता है.

Tuesday, November 22, 2011

तेरे जाने के बाद

अब तो रोज महफ़िल सजती है,
पर अब की महफ़िलों में वो जान नहीं होती तेरे जाने के बाद।
ये चाँद भी खिलता है पर थोड़ा उदास रहता है,
रोटा बिलकता है कभी कभी तो पूरा खिलता भी नहीं,
रूठ कर मुँह फुलाए बैठा रहता है तेरे जाने के बाद।

मैं समझा नहीं जाता हूँ तो कहता है,
तेरे और उसके मिलने और जुड़ने पर
मैं घटा बदलता था पूर्णिमा और अमावस्या का प्रतीक बन कर,
शिकायतें जायज़ हैं लेकिन कैसे बताऊँ इस पागल को,
कुछ वादे किए थे तुझे से ज़िंदगी जीने के,
इसलिए हर दम मुस्कुराता रहता हूँ,
हँसता खेलता रहता हूँ
तेरे जाने के बाद।