मेरे हर इज़हार-ए-मोहब्बत पे उन्होंने
मुझसे शर्माते हुए ये सवाल किया,
कि अब मैं क्या बोलूं,
मैंने कहा ये मोहब्बत तो आपकी अमानत है,
बरसों पहले आपने मेरे पास रख छोड़ दी थी,
इस बात पे वो मुझे पागल कहते हैं,
मैं भी शुक्रिया अदा करता हूँ उनका,
इस बेनाम को उन्होंने एक नाम तो दिया...
Friday, March 2, 2012
हर इज़हार-ए-मोहब्बत
Sunday, January 29, 2012
काश कि कुछ पलों
काश कि कुछ पलों के लिए मेरा दिल तेरे सीने में धड़क सके,
कैसे जी रहा हूँ तेरे बिना अब तक इस दर्द को तुझे समझा सकूं,
ये चाहत नहीं कि तुझे दर्द में तड़पते हुए देखूं,
बस इतनी सी आरज़ू है कि तुझे मेरी तकलीफ से रूबरू करा सकूं...
तेरे जाने के बाद
मेरी ज़िन्दगी से तेरे चले जाने के बाद लोग मुझसे मेरा हाल पूछते हैं,
क्या कहूँ किस हाल में हूँ,
लगता है जैसे किसी गहरे पानी के सागर में डूब रहा हूँ,
और हर एक सांस के लिए मौत से लड़ रहा हूँ,
खून लगता है जैसे मेरी नसों में ही जम गया है,
दिल हर धड़कन पर कहता है कि अब थक गया हूँ उसके बिना धड़कते-धड़कते,
हालात ये हैं कि मेरे जज़्बातों ने मेरे अल्फाज़ को खामोशी दे दी है,
और लोग मुझसे पूछते हैं मेरा हाल तेरे जाने के बाद।
जिसे ढूंढता हूँ,
बहुत शोर है यहाँ कहीं गुम हुई है मेरी आवाज़,
जिसे ढूंढता हूँ,
कुछ सपने हैं टूट के बिचारे हुए,
फिर से जोड़ सकूं वो सपनों के टुकड़े ढूंढता हूँ,
कुछ दोस्त हैं पीछे छूटे हुए,
उनसे फिर मिल सकूं वो कड़ी ढूंढता हूँ,
ऊँची ऊँची सीमेंट की इमारतों में
कहीं दबा हुआ मेरा एक पुराना मिट्टी का घर है,
जिसे ढूंढता हूँ,
दुनिया की भीड़ में खोया है मेरा वजूद,
खुद की पहचान खुद से कर सकूँ,
वो खुद को ढूंढता हूँ...
जिसे ढूंढता हूँ,
कुछ सपने हैं टूट के बिचारे हुए,
फिर से जोड़ सकूं वो सपनों के टुकड़े ढूंढता हूँ,
कुछ दोस्त हैं पीछे छूटे हुए,
उनसे फिर मिल सकूं वो कड़ी ढूंढता हूँ,
ऊँची ऊँची सीमेंट की इमारतों में
कहीं दबा हुआ मेरा एक पुराना मिट्टी का घर है,
जिसे ढूंढता हूँ,
दुनिया की भीड़ में खोया है मेरा वजूद,
खुद की पहचान खुद से कर सकूँ,
वो खुद को ढूंढता हूँ...
Wednesday, January 25, 2012
उनसे मोहब्बत
उनसे मोहब्बत का इज़हार किए ज़माने हो गए,
और बिछड़े हुए भी मुदत्तें हो गईं,
फिर भी रोज़ ख्वाबों में आकर कहती हैं मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ।
हम भी दीवाने हैं,
उनके ख्वाबों को हक़ीकत समझ अपनी ज़िंदगी तनहा गुज़ार दी।
और बिछड़े हुए भी मुदत्तें हो गईं,
फिर भी रोज़ ख्वाबों में आकर कहती हैं मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ।
हम भी दीवाने हैं,
उनके ख्वाबों को हक़ीकत समझ अपनी ज़िंदगी तनहा गुज़ार दी।
Sunday, January 1, 2012
तलाश
वो कहती है मुझसे अपने लिए कोई अच्छी लड़की ढूंढ लो,
मैंने कहा ढूंढ तो लेता लेकिन,
मैं हर लड़की में उन्हें ही तलाश करता हूँ,
और ऊपरवाले ने वैसी एक ही बनाई है...
मैंने कहा ढूंढ तो लेता लेकिन,
मैं हर लड़की में उन्हें ही तलाश करता हूँ,
और ऊपरवाले ने वैसी एक ही बनाई है...
Tuesday, December 27, 2011
हर नाम में उनका नाम सुनाई देता है
आज फिर मेरी मोहब्बत के इम्तिहान का दिन आया है,
उनहोंने मुझे उनके नाम से बुलाने को कहा है,
कैसे बताऊँ मेरी उलझन उन्हें,
किस नाम से पुकारूँ उन्हें,
मुझे तो हर नाम में उनका नाम सुनाई देता है.
उनहोंने मुझे उनके नाम से बुलाने को कहा है,
कैसे बताऊँ मेरी उलझन उन्हें,
किस नाम से पुकारूँ उन्हें,
मुझे तो हर नाम में उनका नाम सुनाई देता है.
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