Tuesday, November 14, 2017

आखिरी फ़ैसला दे मुझे

मोहबत की थी , आज भी है , कल भी करता रहूँगा ।
सही गलत पाप पुण्य कभी सोचा नहीं , तेरे सिवा किसी और का ख्याल आया नहीं ।
एक अजीब तपिश है , जलन है , लगता है जैसे सीने में कुछ धधक रहा है ।
मेरी नसों को गौर से देखता हूँ तो तेरे नाम के अक्षर दिखाई देते है ।
लगता है खून में जैसे तू चल रही है मेरे , ना मरने देती है , ना जीने देती है ।
कभी लगता है तबाह हो गया हूँ , अपनी बर्बादी की तरफ बढ़ रहा हूँ , कभी दुनिया एहसास करा देती है की मैं कुछ बन गया हूँ ।
कुछ बना हूँ या तबाह हुआ हूँ ये सवाल है ।
गहरी नींद से जाग जाता हूँ , जाने क्यों तुझे सोच लेता हूँ ।
कोई नहीं जानता क्या चल रहा है मेरे अंदर , किसी से कुछ कह भी नहीं सकता ।
कभी लगता है रोता हूँ , लेकिन आँखों में पानी नहीं होता । सीने में बहुत तेज़ दर्द होता है ।
बहार से देख के कोई नहीं कह सकता , क्या हो गया हूँ मैं ।
कभी लगता है तिनका तिनका बिखर गया हूँ मैं,
मेरी हस्ती मेरा वजूद सब मिट गया है ,
कभी लगता है सन्यासी हो गया हूँ , किसी भी चीज़ का कोई मोह नहीं है ।
बस एक ही चीज़ है जो ना इस पार जाने देती है ना उस पार
कभी आ के एक बार मिल ले , देख ले क्या है मोहबत , जाने ले की तुझसे भी कोई इतनी मोहबत कर सकता है ।
कोई फैसला कर , पाप है तो सजा दे मुझे , पुण्य है तो कोई फल दे मुझे ।
इस तपिस पे अपनी बारिश कर , की सुखी मिट्टी की तरह तेरी खुशबु से महक जाऊ मैं।
ये मत सोच की बहुत कुछ चाहता हूँ तुझसे, बस इतना कह दे की तूने भी कभी चाहा था मुझे ।
तेरे बिना किसी और का नहीं हो सकता , जो कहा है बस उतना कह दे मुझे और आज़ाद कर दे मुझे ।
किसी भी पार लगा दे मुझे , तबाह कर या आबाद कर , कुछ तो कर के जा मुझे ।
कोई तसल्ली ना दे , आखिरी फ़ैसला दे मुझे ।
तिनका तिनका चुन कर मेरा वजूद मेरी हस्ती लौटा दे मुझे, या ऐसे बिखरा जा की फिर कोई चुन ना सके कोई बिन ना सके ।
जला दे मुझे , राख कर दे मुझे , मिट्टी में मिला दे मुझे ।
बस मेरी रूह को , जिंदगी ने जिससे महरूम रखा , वो सुकून दे दे ।

Tuesday, January 17, 2017

आखिरी अलविदा

" मैं जब 19 साल की थी , तब मेरे भी कुछ सपने थे , बहुत कुछ सोचती थी । मेरी उम्र की बहुत सारी लड़कियों को प्यार हुआ था लेकिन मुझे नहीं ।
फिर मेरी शादी हो गयी , ये अच्छे थे , जैसे आम लड़के होते है , शादी के बाद मुझे इन से लगाव हो गया । इनके लिए बहुत सम्मान आ गया मेरे दिल में । ये एक तरह की मोहबत है , मुझे लगा दुनिया में यही एक तरह की मोहबत होती है । मुझे और किसी तरह के प्यार पे कोई भरोसा नहीं था , मैंने खुद को ढाल लिया था अपनी किस्मत समझ के ।

10 साल पहले मैंने जाना की, मैं गलत थी , इस अनोखी ख़ुशी ने जिसका आने का कोई अंदेसा नहीं था मुझे अचंभित कर दिया । मेरे अंदर मेरे दिल के अंदर जो एक रहस्यमय दरवाज़ा था उससे खोल दिया था ।
मैंने कभी खुद को इतना जीवंत महसूस नहीं किया , जितना मैंने खुद को तुम्हारे साथ किया है । तुम्हारा साथ इतना मोहक है की मन करता है , भगवन का ये उपहार , मैं ले लू ।

लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकती , ऐसा नहीं की मैं तुम्हे उस लायक नहीं मानती या हमारी उम्र में फासले है या हमारी जीवनशैली अलग है । मुझे पता है तुम एक बहुत अच्छे पति , दोस्त, प्रेमी और पिता साबित होंगे।
बल्कि इसलिए की अपने बच्चों को छोड़ना मतलब खुद को छोड़ना, और ऐसा सोचना भी मेरे लिए नामुमकिन है । शायद जब तुम्हारे बच्चे हो तुम ये समझ पाओगे ।
तुम समझ पाओगे की मैं तुम्हारी लिखी हुयी बातों का जवाब क्यों नहीं दे पाती । जब भी ऐसा करती हों खुद को ज्यादा तक़लीफ़ देती हूँ । पर क्या करू , ऐसे बंधन में हूँ जहां मैं समाज के नियम में बंधी हुई हूँ।

हमने बहुत वक़्त साथ गुज़ारा है , बहुत यादगार लम्हे जिए है । आज मैं जो कुछ हूँ उस का बहुत बड़ा श्रेय तुम को जाता है । मेरे अंदर जो आत्मविस्वास है , खुद को जो समझने लगी हूँ तुम्हारी वजह से है ।
मैंने कभी सोचा नहीं था की मैं कभी किसी से इतना प्यार कर लुंगी की , उस के लिखे मेसेज मेरी ज़िन्दगी के अहम् लम्हे बन जायेंगे । उन्हें अपनी डायरी में मैं ऐसे सँजो के रखूंगी । तुम्हारी दी हुयी हर एक चिज़ मुझे बहुत अज़ीज़ है । जाने क्यों तुम्हारी इतनी फ़िक्र है मुझे , ये सब ज़िन्दगी में पहेली बार हुआ है मेरे साथ । जब तुम मेरी फ़िक्र करते हो लगता है , जैसे किसी ने मुझे आसमानी झूले पे बिठा दिया है । मैं तुम्हारे लिए इतनी खास हूँ , बस यही सोच सोच के मेरा दिल और दिन दोनों बन जाते है । जब कभी कोई दिल दुखाता है , तो तुम्हारी बातें , तुम्हारा प्यार , तुम्हारी लिखी नज़्म याद कर लेती हूँ और फिर सब पहले से बेहतर हो जाता है ।

पर अक्सर जो चीज़ हमे सबसे ज्यादा प्यारी होती है , हमे ज़िन्दगी उस के बिना ही गुज़ारनी पड़ती है । तुम से ज्यादा क्या कहू तुम खुद ही इतने समझदार हो ।
लोग कहते है की कोई भी मोहबत पूरी और सच्ची नहीं होती , लेकिन वो लोग तुम से मिले नहीं है अभी तक ।

" तेरे संग बीते हर लम्हे पे हमें नाज़ है ,
तेरे संग जो ना बीते , उस पल पे हमे ऐतराज है " ।

हमेशा खुश रहना , मैं तुम्हे दुनिया की बुलंदी छूता हुआ देखना चाहती हूँ।

मुझे पता है ये पढ़ के तुम को दुःख होगा लेकिन तुम खुद को संभाल लोगे ये भी जानती हूँ । ये लिखते हुए मैं खुद अंदर अंदर टूटी हूँ बहुत बार , बहुत रोई हूँ , पर हम दोनों मजबूर है । हम दूर हो के भी हमेशा करीब रहेंगे, तुम लिखते रहना , मैं जवाब दू या ना दू ,लेकिन तुम्हारा लिखा हुआ , मुझे हिम्मत देता रहेगा , मैं भी लड़ती रहूंगी दुनिया से खुद के सम्मान और स्थान के लिए । मुझे पता है तुम हमेशा मेरे साथ हो और रहोगे , बस ऐसे ही साथ बने रहना । मुझे माफ़ कर देना , मेरी आँखे आज अश्कों से भरी हुई है , माफ़ी इसलिए मांग रही हूँ क्यों की जानती हूँ मेरी आँखों में आँशु से तुम्हे सख्त नफरत है । पर ये मेरी आँखों का पानी सिर्फ तुम्हारे लिए है , बस अब और नहीं लिख सकती दिल बैठा जा रहा है । तुम बस मुझे समझ लेना । और मेरी कसम है तुम्हे अपनी आँखों में पानी लाना नहीं और खुद का ख्याल रखना । तुम अच्छे रहोगे तो मैं अच्छी रहूंगी ।

तुम्हारी और सिर्फ तुम्हारी ।

Dairy pages

कुछ इस तरह तुम्हारे वजूद को अपनी ज़िन्दगी में शामिल कर रहा हूँ , जो उम्मीदें जो ख्वाहिशें तुमसे की थी , वही दुसरो की पूरी कर रहा हूँ।

इश्क़ करना एक बात है और उसकी गहराई समझना अलग बात है । वास्तविक जीवन में अगर तुम मेरे समीप होती तो मैं इस गहराई से कभी वाकिफ ना होता । मेरी कल्पनाओं में तुम्हारे इश्क़ ने , मेरी मोहबत को मुक़म्मल कर दिया ।

कोई सुनने वाला नहीं है इसलिए हाल ऐ दिल कागज़ पे सियाही से लिख रहा हूँ। ये वो जज़्बात है जिनसे मैं भी लिखते वक़्त ही मुखातिब होता हूँ । मैं खुद नहीं जनता मेरे अंदर कितना कुछ दबा हुआ है तुमसे कहने के लिए ।

मैं रोता नहीं बस आँखों में पानी आ जाता है , तुम्हारे होने ना होने की बात नहीं थी , बस एक दर्द है सीने में । जाने क्यों लगता है तुमसे कह देता तो दर्द शायद कम होता । पर अच्छा हुआ तुमने कभी सुना नहीं और यही दर्द मुझे औरो के मर्ज़ का हाकिम बना गया ।

तुम समझी नहीं , मुझे कभी पूरा सूना नहीं , खता किसी की थी आज तक समझा नहीं , हो सकता है मेरा ज़माना मेर दौर सही नहीं था , वरना मेरी मोहबत इतनी कामिल तो थी की तुम अपना लेती ।
ये लिखना किसी की कोई शिकायत नहीं , ये तो बस इसलिए है की इस जलते दिल को , तुम्हारे नाम की ओस मिले और इस ना जाने कबसे जलते तड़पते दिल को कुछ सुकून मिले , राहत मिले ।

Wednesday, December 14, 2016

Quotes by Raj

1. Your pain, your sorrow should lead you to become the person which you have dreamt for so long. Your suffering should push you to fulfill your ambition.

2. Being successful doesn't mean you haven't lost anything , but it means you treasure the lost thing and have built foundation from it to hold the building of your labour.

3. You shouldn't be miserable to persons who are miserable to you. By doing that you are doing favour to yourself as others respect you for being what you are.

मेरी कहानी की बात ही निराली है।

तुम्हारी वो खट्टी मीठी कुछ कुछ बातें
आज भी दिल को गुद गुदा जाती है
काले काले बादलो के पर जब भी देखता हूँ
तुम्हारे कानो की बालियाँ नज़र आती है
झूमती गुन गुनाति पुरवाई तुम्हारे चेहरे पे
आते बालो की याद ताज़ा कर जाती है
सब ख़ामोशी से कहते है मेरी कोई कहानी नहीं है
मैं भी दबी जुबान से कहता हूँ
तुम्हारा नाम ले कर मेरी कहानी की बात ही निराली है।

मैं आज भी उन कसमो को निभा रहा हूँ तुम्हारे हर दुःख के लिए अपनी ख़ुशी त्याग रहा हूँ 


तुमसे कभी कहा नहीं लेकिन तुम्हारे लिए सिंदूर ले आया था माता के दरबार से 
सुनार से एक मंगलसूत्र बनवा लिया था तुम्हरे लिए अपनी पहली तनखा से 
आज भी तुम्हारी ये सारी अमानत संभल के रखी है अपने पास 
जब सात जनमो की कसम की कोई समझ भी नहीं थी शायद उस समय से ही तुमको अपना मान लिया था 
धर्मपत्नी आर्धन्गिनी इन शब्दों के अर्थ से परे था मेरा रिश्ता तुम्हारे लिए 
तुमने सात फेरे तो किसी और के साथ लिए थे लेकिन उन सात फेरो में मन ही मन मैं तुम से बंध गया था
मैं आज भी उन कसमो को निभा रहा हूँ तुम्हारे हर दुःख के लिए अपनी ख़ुशी त्याग रहा हूँ 

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सब समझते है मैं ज़िन्दगी से बहुत कुछ चाहता हूँ 
पर दिल ही दिल में मैं ये जानता हूँ 
मैं ज़िन्दगी से सिर्फ तुम्हे मांगता हूँ 

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हर ख्याल में ख्याल आप है 
हर बात में बात आप है 
हर रात की नींद में ख्वाब आप है 
हर दिन की सुबह में सूरत आप है 
हर ग़ज़ल की पंक्ति आप है 
हर सोच की सोच आप है 
हर इश्क का कलमा आप है 


उम्मीद

तुम से उम्मीद बहुत थी
पर तुम मेरी उम्मीदों तक पहुची नहीं
जितना बाकि लोगो ने समझा मुझे तुम उस से ज्यादा समझ पायी नहीं
मेरे अंदर मुझको ही तुम ढूंढ पायी नहीं
जितनी फ़िक्र मेरी ज़माने को थी उतनी ही फ़िक्र तुम कर पाई मेरी
मेरी तकलीफो में मेरा साथ तुम दे पाई नहीं
जब मेरे पास होना था तुम्हे तब तुम मुझे तनहा कर गई