Monday, August 19, 2024

तकदीर

 "तकदीर को हमारी कुछ परेशानी है 

हमारी मुस्कुराहट से, जब भी मुस्कुराते हुए देखती है,

कोई ऐसा दर्द दे जाती है,

जिसे संभालते-संभालते सीने में आँसुओं का समंदर समा जाता है। 

यहाँ भी एक नियम से बंधे हुए हैं, 

कहते हैं समंदर कभी अपनी मर्यादा लांघता नहीं, 

बस आँखों से छलक सकता है, 

पर कभी नदी-तालाबों जैसे अपना बांध तोड़ नहीं सकता। 

वैसे इसमें हमारी तकदीर का कोई दोष नहीं, 

दर्द से हमारा चोली-दामन का रिश्ता है, जो भी दर्द अब तक मिले हैं, 

उन्हें जीत की निशानियाँ मान ट्रॉफी की तरह सजा के रख लिया है। 

नियति से हमारी यह जंग हमारे जन्म लेने के समय से चली आ रही है, 

वो हमें हारता हुआ मायूस देखना चाहती है, 

पर हम भी अपनी जिद पर अड़े हुए हैं नियति से लोहा लेने के लिए। 

हम कहते हैं जितने दर्द देना है दे दे,

तेरे हर दर्द को अपने लबों पर सजाएंगे एक नई मुस्कान से,

पर इतनी जल्दी हार नहीं मानेंगे जब तक इस ज़िंदगी को एक मिसाल में न बदल दें,

हम लड़ते जाएंगे, चलते जाएंगे।"

इंजीनियरिंग की मोहब्बत

तेरी एक झलक पाने के लिए शेख भाई की टपरी पे बैठ वो कशिश वाली चाय पीना आज भी दिल गुदगुदा देता है किसी तरह तुझसे बात हो जाये इसलिए बहाने बहाने से तुझसे कॉपियाँ माँग लेना, तेरे बोले गए हर शब्द पे जूनियर्स को पार्टी देना अभी भी होंठों पे हँसी ला देता है ट्यूशन के नोट्स लाने के लिए दोस्तों को तेरे घर भेजना और उनके वापस आने पर तेरे बारे में हर बात पूछना उनका थोड़ा कुछ बताने पे जलन होना ये सब सोच सोच के आज भी खुश हो जाना, ऑफिस के काम के टेंशन में भी इंजीनियरिंग के दिनों को ताज़ा कर देता है....

तुम मेरे पास नहीं

कुछ याद होंगे तुम्हे वो बचपन के पल, 

कैसे आसमान को दो हिस्सों में बाट कर सितारों को तोड़ अपनी झोली में भर लिया करते थे,

तुम्हारे चेहरे पर की वो ख़ुशी देखने के लिए मैं हर बार अपने सितारों की गिनती भूल जाया करता था, 

अब की पूरा आसमान है मेरे पास, चाँद तारे भी सारे मेरे अपने हैं,

पर वो ख़ुशी मेरी नहीं जो कभी तुमसे हार कर भी मेरी थी, 

क्योंकि तुम मेरे पास नहीं।

Friday, July 23, 2021

कुछ लड़के होते है

कुछ लड़के होते है जो बचपन में ही बड़े हो जाते है. समय के पहले ही परिपक्व और समझदार हो जाते है | वो कभी भी खिलौनों के लिए ज़िद्द नहीं करते | घर की माली हालात को वो बेहतर समझते है इसलिए वो कभी भी दिवाली पे नये कपड़ों , होली में पिचकारियों की खाव्हिश नहीं करते | घर से बाहर जब पढ़ने जाते है, अपना घर , परिवार ,दोस्त यार , गलियां छोड़ , उनको भी दुःख होता है , पर वो किसी से भी कहते नहीं | दिल को मजबूत करना सिख लेते है | शहर में एक छोटे कमरे में अपना एक छोटा घर बनाने की कोशिश करते है , माँ और पिता जब भी फ़ोन कर के पूछते है, भूखा होने पर भी कह देते है की खाना खा लिया है | जितने काम में गुज़ारा चल सके सिर्फ उतना ही पैसा हर महीने घर से मंगवाते है | पैसे किताबों के लिए बचाने के लिए महीने का हाफ टिफ़िन लगवा लेते है | चाय के शौक़ीन होते है, लेकिन सिर्फ खरच काम करने के लिए रूम में ही काली चाय बनाना शुरू कर देते है | ऐसे लड़को की दोस्ती बहुत होती है, ये हमेशा सब के लिए हाज़िर रहते है | रातों को जाग जाग कर के अपनी पढ़ाई पूरी करते है | इनके पास सिर्फ दो ही जोड़ी कपडे होते है, कभी किसी अमीर दोस्त ने मज़ाक कर दिया कपड़ो को लेकर तो हंस के टाल देते है | ये लड़के सच्चा इश्क़ करना जानते है, एक ऐसा इश्क़ जहां उम्मीद नहीं होती | होता है तो सिर्फ एक तरफ़ा सच्चा इश्क़ | ऐसे लड़के कभी किसी से कुछ कहते नहीं , लेकिन सुनने की क्षमता अदभुत रखते है | इनका भी दिल टूटता है पर ये अपने दुःख से खुद को और मजबूत करते है | ये जंगल के पेड़ जैसे बन जाते है , जो हर स्तिथि में जीना सिख लेते है, हर मौसम को आत्मसात कर लेते है | ये कभी किसी से शिकायत नहीं करते है , बस हर समस्या का हल निकलना जानते है | ऐसे लड़कों से कोई नहीं पूछता की "कैसे हो", ये खुद से ही कहते रहते है "बेहतर है, चलो ये भी ठीक है " | ये अपने हर दुःख और दर्द को दफ़न कर आगे बढ़ना जानते है | ऐसे लड़के "देवदास" फिल्म देख के अपने सच्चे प्यार को याद कर आँखे भर लेते है, तनहा हो के रो लेते है | "बर्फी " फिल्म देख सोचते है , इनके लिए भी कोई आएगा अपना सब कुछ छोड़ के , और बस सोच के खुश हो जाते है | जानते है यथार्त में उनके साथ कभी ऐसा कुछ होने वाला नहीं है | लेकिन वो हर पल कुछ भी सोच के खुश होना जानते है | कभी अगर आप किसी ऐसे ही किसी लड़के के करीब आये तो उन्हें अपने सीने से लगा लेना, शायद उनके दुःख दर्द का कुछ हिस्सा बह निकले | थोड़ा समय दे इनकी भी कहानी सुन लेना , जो इन्हो ने कभी कहीं भी कही नहीं , किसी ने सुनी नहीं |

Wednesday, March 18, 2020

ज़िन्दगी का बोझ

उसने मुझसे कहा ज़िन्दगी का बोझ बहुत बड़ा होता है |
मैंने कहा किसी से एक तरफा इश्क़ कर लो
ज़िन्दगी का बोझ छोटा लगने लगेगा | 

बुनियादी फर्क

जैसे तुम मुझे से रूठ जाती हो
वैसे मैं भी रूठ सकता हूँ |
जैसे तुम मुझ से बिना बात किये रह सकती हो
वैसे मैं भी बिना बात किये रह सकता हूँ |
जैसा व्यवहार तुम मेरे साथ करती हो भी
वैसा व्यवहार मैं भी कर सकता हूँ |
जैसे तुम मेरी बिना फ़िक्र किये रह सकती हो
वैसे मैं भी तुम्हारी फ़िक्र किये बिना रह सकता हूँ |
तुममें और मुझमें एक बुनियादी फर्क है
बस वो फर्क हमेशा रहना चाहिए,
उसका ही लिहाज़ कर लेता हूँ |  

Thursday, February 6, 2020

वो भी ऐसा करता है क्या

जैसी फिक्र मैं करता हूँ,
वैसी ही फिक्र वो भी करता है क्या ।
जैसा मैं सब कुछ छोड़ के तुम्हें ध्यान से सुनता हूँ
वो भी ऐसा करता है क्या।
तुम्हें परेशान देख मेरी तरह ही
वो भी विचलित होता है क्या ।
माना जिस्मों का मिलन हुआ होगा उसका तुम्हारा
तुम्हारी रूह से मेरी रूह की तरह उसकी रूह भी जुड़ी है क्या ।
मेरी तरह वो भी यहां वहां की बातें करके तुम्हें हँसाता है क्या ।
मेरे साथ जितना सहेज महसूस करती हो,
उतना ही सहज वो भी तुम्हें महसूस कराता है क्या ।
मैं जैसी तुम्हारी तारीफें करता हूँ
वो भी तुम्हारी ऐसी ही तारीफें करता है क्या ।
मेरे लिए दुनिया में तुम जितनी जरूरी हो,
उस के लिए भी उतनी ही जरूरी हो क्या ।
मैं जब तुम्हारी उँगली पकड़ रोक लेता हूँ,
वो भी ऐसे रोकता है क्या ।
मेरे साथ जो एहसास होता है तुम्हें
वो ऐसा कोई एहसास करता है क्या ।
जैसे मैं तुम्हारी तस्वीरों को चूमते रहता हूँ, वो भी तुम्हारी हर तस्वीर को चूमता है क्या ।
मेरी आँखों में जैसे तुम्हारे लिए पानी आता है,उसकी आँखों में भी तुम्हारे लिए पानी आता है क्या ।
मैं जैसे तड़पता हूँ तुम्हारे लिए,
वो भी ऐसे ही तड़पता है क्या ।
जैसे मैं डरता हूँ हर घड़ी तुम्हे खों देने से,
वो भी ऐसे ही डरता है क्या।

जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था

खुद को बर्बाद कर रहा था,
जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था ।
टूट रहा था बिखर रहा था,
जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था।
पल पल मर रहा था,
जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था ।
दीवानगी की हदें पार कर रहा था,
जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था ।
रो रो के आंखें लाल कर रहा था,
जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था ।
गीता के श्लोक कुरान की आयतें पढ़ रहा था,
जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था ।
फकीरों की मज़ारों पे मन्नत के धागें बांध रहा था,
जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था।
बहाने बहाने से तुम्हारे पास आ रहा था,
जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था।
रगों में अपने ही खून को दौड़ा रहा था,
जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था ।
सब्र को भी सब्र करने को कह रहा था,
जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था ।
चलते चलते पीछे पलट के देख रहा था,
जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था ।
और किसी का ख्याल जेहन में आने नहीं दे रहा था,
जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था ।
दिल को अपने झूठी तसल्ली दे रहा था,
जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था ।
इंतेज़ार करते करते शामें रातें कर रहा था,
जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था ।
खुद की ज़िंदगी बेरंग कर तुम्हारी ज़िन्दगी रंगीन कर रहा था,
जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था।
तुम्हें कद्र नहीं फिर भी भावनाएं व्यक्त कर रहा था,
जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था ।
आसमान के सितारों को तुम्हारी मिसालें दे रहा था,
जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था ।
ईर्ष्या की अग्नि में जल रहा था,
जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था ।
सब कुछ त्याग संन्यासी बन रहा था,
जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था ।
अपना सर्वस्त्र तुम पर न्यौछावर कर रहा था,
जाने क्यों तुमसे इश्क़ कर रहा था ।

Thursday, January 30, 2020

तेरा मेरे इश्क़ से रूबरू होना

तेरा सबसे जुदा खड़े रहने का अंदाज़
जैसे तिलस्म से किसी पत्थर को तराश देना
तेरे होंठो पे हल्की मुस्कान लाने की अदा
जैसे छोटे बच्चे का चुपके से कोई मिठाई खाना
संपर्क का कोई उपग्रह,जैसे तेरे कानों की बालियाँ
तेरा गुलाबी रंग की साड़ी में चले के आना
जैसे सरसों के खेतों में हवा का सरसरना
तेरे हाथों की मेहंदी का महकना
जैसे मंदिर में धूपबत्ती की खुसबू बिखर जाना
तेरे खुले बालों के साये में आना
जैसे उजले चाँद के साथ गहरी रात का आना
तेरे प्यारे से चेहरे पे तेरी गहरी आँखों का होना
जैसे बहुत सारी सीपों में किसी मोती का मिल जाना
तेरी कलाइ में कंगन का यूँ ठहर जाना
जैसे आसमान में तारों का एकत्रित हो जाना
तेरी उंगलियों में अंगूठीयो का होना
जैसे पुस्तैनी ख़ज़ाने का दिख जाना
तेरे माथे पे छोटी लाल बिंदी का होना
जैसे दौड़ती जिंदगी को कुछ पल रुकने का इशारा किया जाना ।
तेरा मेरे इश्क़ से रूबरू होना
जैसे बेहद खूबसूरत लालगुलाब का पंखुरियों पे ओस की बूँद लिए खिल जाना ।

इज़हार इंकार का खेल

चलो बहुत हुआ इज़हार इंकार का खेल
अब कुछ ना कहने में ही सुकून है ।
इतना कहने सुनने पर भी तुम वो समझ ना सकी
जो मैं तुम्हें महसूस करवाना चाहता था।
तुम वो ना कह सकी जो मैं सुनना चाहता ।
तुममें और मुझमें सदियों का फासला था।
मेरी कल्पनाओं और यथार्थ में बहुत फर्क था।
रोज़ एक ही सवाल का जवाब खोजता रहा
की मैं कँहा गलत था ।
इश्क़ करना गलत था या तुमसे कोई उम्मीद रखना
गलत था ।
हर एक भावना व्यक्त करना गलत था या घड़ी घड़ी तुम्हारी फिक्र करना गलत था ।
गलत अगर कुछ नहीं था तो फिर शायद ग्रह नक्षत्र का कोई फेर था।
सही गलत जो भी था, बस इतना तय था मैं तुम्हारी ज़िन्दगी में दूर दूर तक शामिल नहीं था ।
महसूस करना,सुनना समझना सब अपनी जगह था,
पर मेरी तरफ से मेरा इश्क़ मुक़म्मल था।
अब खुद को अच्छे से समझा लिया था,तुम्हारे आश्वासन तोड़ आगे बढ़ चुका था।
तुम्हें खो देने के डर को अब जीत चुका था ।
तुम्हरी राह तकते तकते खुद की मंज़िल चुन चुका था ।
तुम्हें पाने की कोशिश करते करते,मैं खुद को पा चुका था ।
तुम्हारे होने ना होने का अब कोई मलाल ना था,
मैं अपने इश्क़ पे फना हो मस्त मलंग हो चुका था ।

Tuesday, January 21, 2020

शिकायतें

शिकायतें बहुत है तुझसे ऐ ज़िन्दगी ,
बस खुद में वो अधिकार ला नहीं पाएं की तुझसे कोई सवाल करते
जो तूने दिया मुक़दर का हिस्सा मान रख लिया
जाने कितने आशुओँ का सैलाब दबाएँ बैठे है
कितनों को इन कंधों का आसरा था,
बस खुद के लिए कोई कंधा ढूंढ नहीं पाए |
अपने होंठों की हँसी भी हमने गिरवी रख दी
और तेरा तकाज़ा था ऐ ज़िन्दगी की उसको छुड़ा भी न पाएं |
कितनी दास्तानों को खुद में समेटे हुए है,खुद की कहानी कहें ज़माने हुए |
ऐ ज़िन्दगी तेरा अदब था हर जिम्मेदारी हर जवाबदारी को कसमों जैसे निभाते रहे |
जाने किस किस की कदर करते रहे, बस खुद को भरे बाज़ार नीलाम करते रहे |
सब का ख्याल रखा, खुद की बेख़याली को तोड़ ना पाएं |
कितना कुछ है तुझसे कहने सुनने को ऐ ज़िन्दगी
बस तूने कभी वक़्त दिया नहीं और हम तुझसे वक़्त मांग ना पाएं |

मेरे इश्क़ और तुम्हारे इश्क़ में फर्क

मेरे इश्क़ और तुम्हारे इश्क़ में फर्क बहुत था,
तुम इश्क़ के सागर की सतह पर थी ,
और मैंने तल को छू लिया था |
तुम्हारी नज़र अब भी दुनिया पर थी,
मुझे सिर्फ मेरी धड़कन और साँसें सुनाई देती थी |
मेरे और तुम्हारे अनुभव अलग अलग थे
तुम मेरे पास आना तो चाहती थी पर संसार में रहते हुए
और मैं विरक़्त शांत तल में तुम्हें महसूस कर रहा था |
तुम अब भी दुविधा में थी,मैंने सब दुविधा छोड़ दी थी |
तुम्हारी अपनी अलग मजबूरियां थी,
तुमसे इश्क़ करते ही मेरी सारी मजबूरियां काफूर थी |
सतह से तल की गहराई ही हमारे बीच की दुरी थी,
पर वही गहराई किसी खाई से कम ना थी |
नियति का ही खेल था हम दूसरे के पूरक थे
पर एक दूसरे के बिना अधूरे थे |
तुम मेरे साथ साथ,संसार को पाना चाहती थी,
मैंने तुमहारे साथ साथ खुद को पा लिया था |

Tuesday, January 14, 2020

एक सरकारी आवास को,अपना घर बनाया था

एक सरकारी आवास को,अपना घर बनाया था |
कुछ और से नहीं
दोस्ती,मोहबत और चाय के रंगों से सजाया था
सामान ज्यादा कुछ नहीं था पर दिल भरे थे
किसी के भी कमरे और दिल में ताले नहीं थे
सब कुछ खुला था, बे रोकटोक आते जाते थे |
सुख दुःख में सबने एक दूसरे को संभाला था |
जाने कितनी महफ़िलो को चाय की चुस्कियों और
ग़ज़लों से सजाया था |
बे सिरपैर की बातें, हँसी के ठहाके
हरदम हमारे साथ रहते थे |
प्यार भरी गालियों को दीवारों ने खुद में समेट रखा था |
शामें अक्सर रातें हो जाया करती थी ,
नींद आँखों में आ आ के दम तोड़ देती थी |
सुबह कुछ अलसाई सी होती ,
चाय हर किसी को बड़े से कप में चाहिए होती थी |
जिम्मेदारियाँ तो थी सब के ऊपर,
लेकिन उस घर में अलग ही बेफिक्री थी |
कहीं से भी थक हार के आते थे लेकिन
वो हम सब का अपना सुकून घर था |
सुना है अब वो आवास खाली है ,
फिर कोई गया नहीं वहाँ जो उसको घर बना सकता था |
दरों ओ दीवार में हमारे जैसे जो अपनापन भर सकता था |
एक सरकारी आवास था जिस को हमने आशियाना बनाया था,
दुनिया की भीड़ से जुदा होकर खुद की शख्सियत को पहचाना था |

Monday, January 13, 2020

तेरे मेरी मोहबत की कहानी

तेरे वादे पर हर बार एतेबार करना, फिर तेरा इंतज़ार करना,
तेरा हर बार दिलासा दे मुकर जाना,
मेरा खुद की नज़रो में पहले से और गिर जाना
फिर भी तुझसे वही टूट के मोहबत करना |
तुझे अपना सब कुछ मान लेना
और तेरे लिए मेरा होना ना होना
मेरे लिए नामुमकिन किसी और को चाहना
तेरे लिए आसान मुझे नज़रअंदाज़ करना
तेरा एक बार मुस्कुराना ,
मेरा फिर मोहबत की उन पथरीली गलियों में अकेले भटक जाना |
तेरा एक बार पास आके छू लेना ,
सही गलत सोच समझ से परे मेरा फिर तेरे इश्क़ में मलंग हो जाना |
बस इतनी तेरे मेरी मोहबत की कहानी ,
तेरे लिए बस एक फ़साना , मेरे लिए पूरी ज़िंदगानी |

तुमसे इश्क़,जैसे कोई गहरी साधना

तुम से दूर होना,जैसे दुःख दर्द वियोग की पराकाष्ठा को अपनी रग रग में अनुभव करना |
तुम्हारे कंधे पे सर रखना जैसे सारे दुःख दर्द वियोग का कोई तिलस्मी इलाज़ मिल जाना |
तुम्हारी गोद में चेहरे पर तुम्हारी चुनरी ओड लेना ,जैसे धरती और आसमान को एक साथ महसूस करना |
तुम्हारे हाथो का वो मख़मली एहसास, जैसे ओस की बूँद को छू लेना |
तुम्हारी वो महक ,जैसे सैकड़ों गुलाबों का इत्र |
तुम्हारे समीप होना, जैसे सुप्त और ज्वलंत ज्वालामुखी का एक साथ करीब होना |
तुम्हारी साँसों की आवाज़, जैसे बहती नदी की रवानगी |
तुम्हारी उँगलियों की वो अगूंठियाँ , जैसे किसी बेहतरीन कारीगर की कारीगिरी |
तुम्हारी आँखों की वो मादकता, जैसे पैमाने से मय का छलक जाना |
तुम्हारे होंठों की हलकी हँसी ,जैसे शांत सागर का किनारा |
तुम्हारी कमी के साथ जीना, जैसे जीवन में रोज़ कठिनाई का आना |
तुम्हारा हँस कर महसूस किये दर्द को छुपा लेना,जैसे एक परत के ऊपर दूसरी परत चढ़ा लेना |
तुम्हारी साँसो की गरमाहट,जैसे कड़ कड़ाती सर्द रातों में जलता अलाव |
तुमसे इश्क़,जैसे कोई गहरी साधना |

Sunday, August 18, 2019

अजीब कसमकश थी

अजीब कसमकश थी, एक लंबे अरसे की जुदाई के बाद मिलने की एक आस जागी थी ।
क्या कहूँ क्या करूँ, जाने क्या क्या करूँ,
पेट में तितलियों की अनगिनत गुदगुदी थी ।
तुमसे मिलने के समय कैसे खुद को रोक लू,
कैसे आँखों के समंदर को समेट लू
तुम्हारे लिए ऐसा क्या लेके जाऊ, की तुमको हमारा मिलना याद रह जाये ।
दिल की धड़कनों का सबब तो क्या कहे क्या था
लग रहा था समय जैसे फिर 20 साल पहले चले गया है
हम शेखभाई की टपरी पे स्कोटी पे आती मेरी पूनम का थामे दिल से इंतज़ार कर रहे है ।
जाने कितने सवाल जवाब, भावनाओं के उठते तूफान
सब जैसे तैसे समेत आप के सामने आए थे ।
कितना कुछ था आप से कहने के लिए, आप से सुनने के लिए, जी चाह रहा था आप को सीने से लगा ले, आप की खुश्बू को खुद में क़ैद कर ले ।
पर कुछ ना कर सके, बस आप को जी भर देखते रह गए, दिल के नमक को आँखों के पानी में घोल के पी गए ।
आप के सीने से लग जाते तो खुद को रोक पाना मुमकिन ना होता, इतने बरसों की तड़प, इतने बरसों का इंतज़ार , ज्वालामुखी जीवित हो गया होता ।
कुछ कसक रह गयी, कुछ सुकून मिला ।
आप की खुश्बू को अपने हाथों की हथेलियों में समेट ले जा रहा था, आप की वो आंखे ,
आप का अंदाज़ ऐ बयान ,आप की हंसी , आप के हाथों की उँगलियाँ अपने जेहन के एक हिस्से में संभाल के सहेज रहा था ।
तुम्हारे पास बैठे होने का एहसास, तुम्हे छू लेने का एहसास, जाने कितने एहसासों का पिटारा बांध रहा था ।
पूनम के लिए मैं मस्त मलंग ही तो था, जो सदियों को कुछ पल में जी रहा था। माना जो कहना था कह ना पाया, सीने से लग ना पाया, पर इन पलकों को फिर कुछ सपनों का आधार मिल गया ।
रिश्ता कोई क्या समझता तेरा मेरा और मैं क्या ही समझा पता, रिश्ता एक सच्ची मोहबत का था, जाने कितने बरसों की इश्क़ की अनकही दास्तान थी , जहां राजू की पूनम थी और पूनम का राजू ।

एक दूसरे से जुदा होकर दोनों ने खुद को पा लिया था

हम दोनों खड़े थे दरवाज़े के चौखट पे, आंखों में आँशु लिए, गले में वो शब्द लिए जो कह नही सकते थे एक दूसरे से ।
कितनी अजीब जगह मिल रहे थे हम दोनों, शायद वो चौखट ही हमारी ज़िंदगी को बयां कर रही थी ,
हम दोनों भी तो चौखट के दो हिस्से ही थे,जो कभी मिल नही सकते थे,बस एक दूसरे को देख सकते थे ,
अपने अपने हिस्से से एक दरवाज़े की सारी जिम्मेदारी संभाल रहे थे । दिल का जो दर्द था वो गले में रुंध गया था,
आंखों से जो बह रहा था वो गले में रुंधे शब्दों को बाहर निकल ने से रोक रहा था।
बहुत कुछ हो सकता था, कहा सुना जा सकता था , पर दोनों ने आंखों में दिल का नमक रख लिया और चुपचाप सिसकते रहे ।
दोनों सारी जिंदगी एक दूसरे का दर्द लिए जीते रहे,एक दूसरे के लिए मरते रहे। दोनों चैन से जी ना सके,तड़पते रहे,तरसते रहे ।
बैरागी से थे दोनों संसार में रहते रहते बैराग खोज लिए थे । खुद में खुद हंसते थे,खुद में खुद रोते थे और खुद को खुद समझ बुझा लेते थे ।
दुनिया में हो के भी दुनिया की ज़रूरत नही थी | एक दूसरे से जुदा होकर दोनों ने खुद को पा लिया था ।

Saturday, March 30, 2019

मज़ार मेरी बने और चादर तेरी चढ़ जाए

25/03/2019

ये दिल समझता ही नही की तू मेरी नही ,तुझे मुझसे मोहबत नही ,तुझे मेरी कोई फिक्र नही,तेरी ज़िन्दगी में मेरी कोई अहमियत नही ।
कोई आस है जो टूटती नही ।रास्ता भी तू नही,मंज़िल भी तू नहीँ फिर भी हर सफर हमसफर तू है ।
तुझसे ज़ाहिर करु ना करू, मोहबत करु या ना करु अब ये सवाल नही है ,तेरे बिना कैसे रहू,तेरे बिना सांसें कैसे लू अब ये सवाल है ।
बहुत आसान है तुझे बिना कुछ कहे दूर चले जाना,मुश्किल है वो जगह ढूंढना जहाँ तू नहीँ ।
कोई तरकीब कर की तू मेरी ना हो के भी मेरी हो जाये, जो फासले है तेरे मेरे दरमियाँ वो मिट जाये ।
एक बार आ के की तेरी रूह से मेरी रूह रूबरू हो जाये। या तो कोई उम्मीद पूरी कर दे या ऐसे नाउम्मीद कर जा की कोई आस बाकी ना रहे ।
ये जो सांसे टिकी है तेरे इंतेज़ार में,इनका भी कुछ तो फ़ैसला हो जाये ।जो सिलसिले है बरसों से मुसलसल,उनको मुक़म्मल कर जाए ।
ये जो रातों को उठ उठ के तुझे तलाशता हूँ सिरहाने ,उस तड़प को सुकून का वो पल दे जाए ।
दुआ कर मेरे साथ एक आखिरी बार, की वो दुआ क़बूल हो जाये। मज़ार मेरी बने और चादर तेरी चढ़ जाए।

कोई है नहीं जिस से कह सकु, इसलिए लिख रहा हूँ

Date : 29/11/2018

मैं दुनिया से खफा हूँ या दुनिया मुझसे, कुछ पता नहीं
बस एक नाराज़गी की लहर महसूस होती है हर जगह ।
कोई कुछ कहता नहीं, सब बनावटी सी बातें करते है,दिखावे के लिए हँसते है ।
कोई अपना कुछ कहता नहीं , कोई अपना सा लगता नहीं । कोई रिश्ता अब रिश्ते निभाता नहीं ।
सब का स्वाभिमान, सब का अहंकार सबसे बड़ा हो गया, जो त्याग था जो बलिदान था सब भूतकाल हो गया ।
जिस को बनाने के प्रयास में अरसा गुज़रा, एक पल लगा उसको बिखरने में ।
जिस मोह्बत को खुले हाथों से बांटता रहा,उसी मोह्बत ने ख़ुद से महरूम रखा। इस जहान का होके भी इस जहान का हो ना सका ।
दुनिया मुझे समझ ना सकी, मैं दुनियादरी कर ना सका ।किसी से नाराज़ नहीं बस खुद से बहुत ख़फ़ा हूँ ।
कोई है नहीं जिस से कह सकु, इसलिए लिख रहा हूँ ।

तुझे अपने दिल के तख्त पे बिठाया है

तेरे नाम पे आज भी महफिले सजती है,
तेरी बातों के बहाने बहाने से ज़िक्र होते है,
तेरी हर अदा पे, हम दिल पे हाथ रख आहे भरते है
तेरी इतर की खुशबू पाने के लिये सारे घर की खिड़की दरवाज़े खोल के रखते है ।
तू जिस जगह से गुजरती है, हम घंटों बैठ तुझे वहां महसूस करते है ।
तुझे एक नज़र देखने के लिए जाने कितने झरोखे से झांकते रहते है ।
तू जब चलते चलते पीछे पलट के देख लेती है, हम अमीन कहते है ।
जिंदगी के हर अंधेरे को तेरी आँखों की चमक से रोशन किया है ।
तेरे लबों से अपनी मटमैली जीवन में सुर्ख लाल रंग भरा है ।
तेरे लायक दुनिया में कोई जगह सही लगी नहीं इसलिए तुझे अपने दिल के तख्त पे बिठाया है ।