Monday, January 19, 2015
Tuesday, December 23, 2014
ज़िन्दगी और मैं
इतनी बेसबर क्यों है ज़िन्दगी , कुछ लम्हा ठहर जाये तो क्या
बहुत कुछ है कहने को बहुत कुछ है करने को
अभी बस खुद को थोड़ा समझ लू थोड़ा कुछ को जान लू तो क्या
अभी मैं खुद से कुछ कहना चाहता हूँ
इन लम्हों में रुकना चाहता हूँ अपने आप से मिलना चाहता हूँ
लगता है जैसे कितने समय से बस चल रहा हूँ
कुछ देर पीछे मुड़ के देख न चाहता हूँ
ये बेसबर ज़िन्दगी क्या मुझे इतना भी मौका नहीं देगी
ज़िन्दगी मुझे पे इतनी बेरहम भी तो नहीं
अभी थोड़ी मोहबत बाकि है ज़िन्दगी की मेरे लिए
ज़िन्दगी भी मुझे से चाहती है की मैं खुल के एक बार खुद से मिल लू
ताकि पीछे फिर कोई अफ़सोस ना मुझे रहे ना ज़िन्दगी को
बस जब भी मिले फिर ज़िन्दगी और मैं मुस्कुरा के मिले.
बहुत कुछ है कहने को बहुत कुछ है करने को
अभी बस खुद को थोड़ा समझ लू थोड़ा कुछ को जान लू तो क्या
अभी मैं खुद से कुछ कहना चाहता हूँ
इन लम्हों में रुकना चाहता हूँ अपने आप से मिलना चाहता हूँ
लगता है जैसे कितने समय से बस चल रहा हूँ
कुछ देर पीछे मुड़ के देख न चाहता हूँ
ये बेसबर ज़िन्दगी क्या मुझे इतना भी मौका नहीं देगी
ज़िन्दगी मुझे पे इतनी बेरहम भी तो नहीं
अभी थोड़ी मोहबत बाकि है ज़िन्दगी की मेरे लिए
ज़िन्दगी भी मुझे से चाहती है की मैं खुल के एक बार खुद से मिल लू
ताकि पीछे फिर कोई अफ़सोस ना मुझे रहे ना ज़िन्दगी को
बस जब भी मिले फिर ज़िन्दगी और मैं मुस्कुरा के मिले.
Tuesday, December 9, 2014
आप के लिए मेरे कुछ ख्याल
जब भी आप को देखता हूँ लगता है भगवान ने आप को सिर्फ और सिर्फ इसलिए धरती पे भेजा है
की आप को देख कर मोह्बत की जा सके
आप को देख कर साँसे थम जाती है लगता है बार बार आप को ही देखते रहू
जाने कितनी बार भी देख लो मन ही नहीं भरता
दिल में कसक रह जाती है फिर एक बार आप को देखने के लिए
आप से मोह्बत होने ने बाद फिर किसी और से मोह्बत नहीं हो सकती है
दिल में आप के लिए जो जगह है वो इस जनम में तो कोई और ले नहीं सकता
ज़िन्दगी में जो एक ही हसरत है वो है आप को अपने सामने बैठा कर के जी भर देख ने की
कभी कभी डर भी तो लगता है कहीं आप को मेरी नज़र तो नहीं लगेगी
फिर मेरी पाक मोह्बत ही मुझे से कहती है इश्क़ को भी कभी क्या इश्क़ की नज़र लगी है
कभी कभी ऐसा भी ख्याल आता है काश मैं भी आप के जीवनसाथी की तरह किस्मत वाला होता
आप मेरी होती और मैं आप का होता
सारी ज़िन्दगी आप को सिर्फ अपनी नज़रो से छूता ,आप को अपने हाथो से छू लेने की भी गुस्ताखी न करता
बस सारी ज़िन्दगी अपनी आँखो से आप के लिए ग़ज़ल लिखता जो आप अपनी नज़रो से
पढ़ती
की आप को देख कर मोह्बत की जा सके
आप को देख कर साँसे थम जाती है लगता है बार बार आप को ही देखते रहू
जाने कितनी बार भी देख लो मन ही नहीं भरता
दिल में कसक रह जाती है फिर एक बार आप को देखने के लिए
आप से मोह्बत होने ने बाद फिर किसी और से मोह्बत नहीं हो सकती है
दिल में आप के लिए जो जगह है वो इस जनम में तो कोई और ले नहीं सकता
ज़िन्दगी में जो एक ही हसरत है वो है आप को अपने सामने बैठा कर के जी भर देख ने की
कभी कभी डर भी तो लगता है कहीं आप को मेरी नज़र तो नहीं लगेगी
फिर मेरी पाक मोह्बत ही मुझे से कहती है इश्क़ को भी कभी क्या इश्क़ की नज़र लगी है
कभी कभी ऐसा भी ख्याल आता है काश मैं भी आप के जीवनसाथी की तरह किस्मत वाला होता
आप मेरी होती और मैं आप का होता
सारी ज़िन्दगी आप को सिर्फ अपनी नज़रो से छूता ,आप को अपने हाथो से छू लेने की भी गुस्ताखी न करता
बस सारी ज़िन्दगी अपनी आँखो से आप के लिए ग़ज़ल लिखता जो आप अपनी नज़रो से
पढ़ती
Wednesday, November 19, 2014
तुम मेरी हो और मैं तुम्हारा ये मान सकता हूँ
ना तुम्हारे पास रह सकता हूँ ना तुम्हारे साथ रह सकता हूँ
ना तुमसे दूर रह सकता हूँ ना तुम्हारे बिना रह सकता हूँ
बस सुकून है तो इतना की तुमसे दूर रह के भी तुम्हारे बिना रह के भी
तुमसे हमेशा मोह्बत कर सकता हूँ अपने दिल की हर बात तुमसे कह सकता हूँ
अपने मन की हर उलझन को तुमसे सुलझा सकता हूँ
तुम मेरी हो और मैं तुम्हारा ये मान सकता हूँ
ना तुमसे दूर रह सकता हूँ ना तुम्हारे बिना रह सकता हूँ
बस सुकून है तो इतना की तुमसे दूर रह के भी तुम्हारे बिना रह के भी
तुमसे हमेशा मोह्बत कर सकता हूँ अपने दिल की हर बात तुमसे कह सकता हूँ
अपने मन की हर उलझन को तुमसे सुलझा सकता हूँ
तुम मेरी हो और मैं तुम्हारा ये मान सकता हूँ
Monday, November 17, 2014
आप इश्क़ है मेरा
आप इश्क़ है मेरा, वो इश्क़ जिस पर हमे नाज़ है गुरुर है अभिमान है फक्र है
बस ना मेरे लिए कोई शर्ते है नहीं आप के लिए कोई शर्ते है
हम दोनों इस इश्क़ में भी आज़ाद है अपनी अपनी ज़िन्दगी जीने के लिए
बस ना मेरे लिए कोई शर्ते है नहीं आप के लिए कोई शर्ते है
हम दोनों इस इश्क़ में भी आज़ाद है अपनी अपनी ज़िन्दगी जीने के लिए
Saturday, September 13, 2014
मासूम मोह्बत
अब भी सर्द मौसम की सुबह में उसी मासूम मोह्बत के साथ खिड़की के कांच पे जमी ओस पे तुम्हारा और मेरा नाम लिखा करता हूँ
आज भी सुबह की चाय में अदरक की सुगंध के साथ तुम्हारे हाथो की महक आती है
तुम्हारे पसंदीदा गानो की प्लेलिस्ट भी बना ली है अक्सर सुनता हूँ ऑफिस से आने के बाद
लगता है जैसे तन्हाई में पास आ कर के तुम कानो में मेरे गुनगुना रही हो
कहने को मेरे घर की हर दीवार कोरी है पर मेरी आँखों से देखो तो हर दीवार पे सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी तस्वीर है
मेरी और तुम्हारी प्रेम कहानी के अनोखे किस्से कहानियाँ भी लिखी हुई है जो सिर्फ मैं पढ़ता हूँ
पहाड़ो से बहते झरनो को देख तुम्हारे कानो के झुमके याद आते है
रात के अँधेरे में पुरे चाँद को देखता हूँ तो तुम्हारे माथे की बिंदी याद आती है
तुम्हारी एक चुनरी चुपके से चुरा ली थी आज भी तकिये में रख के सोता हूँ
जानता हूँ दुनिया की नज़र में ये सब पागलपन है पर किसी को कैसे समझाऊ की
तुम्हे पाना खोना मेरे हाथ में नहीं था पर तुमसे बेइंतेहा मोह्बत करना मैंने अपना धर्म मान लिया था
और उसी मासूम मोह्बत के साथ अब मैं सिर्फ अपने धर्म का पालन कर रहा हूँ
आज भी सुबह की चाय में अदरक की सुगंध के साथ तुम्हारे हाथो की महक आती है
तुम्हारे पसंदीदा गानो की प्लेलिस्ट भी बना ली है अक्सर सुनता हूँ ऑफिस से आने के बाद
लगता है जैसे तन्हाई में पास आ कर के तुम कानो में मेरे गुनगुना रही हो
कहने को मेरे घर की हर दीवार कोरी है पर मेरी आँखों से देखो तो हर दीवार पे सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी तस्वीर है
मेरी और तुम्हारी प्रेम कहानी के अनोखे किस्से कहानियाँ भी लिखी हुई है जो सिर्फ मैं पढ़ता हूँ
पहाड़ो से बहते झरनो को देख तुम्हारे कानो के झुमके याद आते है
रात के अँधेरे में पुरे चाँद को देखता हूँ तो तुम्हारे माथे की बिंदी याद आती है
तुम्हारी एक चुनरी चुपके से चुरा ली थी आज भी तकिये में रख के सोता हूँ
जानता हूँ दुनिया की नज़र में ये सब पागलपन है पर किसी को कैसे समझाऊ की
तुम्हे पाना खोना मेरे हाथ में नहीं था पर तुमसे बेइंतेहा मोह्बत करना मैंने अपना धर्म मान लिया था
और उसी मासूम मोह्बत के साथ अब मैं सिर्फ अपने धर्म का पालन कर रहा हूँ
Thursday, September 11, 2014
वक़्त
मेरी साँसे मेरी धड़कन अब मुझसे बेवफाई करने लगी है
शायद इन्हें मेरे और तुम्हारे बीच बढ़ते फासलो का एहसास होने लगा है
वजह तो शायद न मैं दे सकूँ न तुम्हारे पास कोई वजह है
बस यही कह सकते है अभी वक़्त सही नहीं है मेरे और तुम्हारे रिश्ते के लिए
ये वक्त इम्तिहान ले रहा है मेरे लिए तुम्हारी मोह्बत का और तुम्हारे लिए मेरी मोह्बत का
मन में शंका कुशंका का दौर चल रहा है
पर इस सब विचारो के द्वंदों के बीच भी एक अटल विश्वास कायम है
हमारी मोह्बत वक्त की सारी कसौटीयो पर खरा उतरेगा
और दुनिया में मोह्बत की एक नयी मिसाल देगी
शायद इन्हें मेरे और तुम्हारे बीच बढ़ते फासलो का एहसास होने लगा है
वजह तो शायद न मैं दे सकूँ न तुम्हारे पास कोई वजह है
बस यही कह सकते है अभी वक़्त सही नहीं है मेरे और तुम्हारे रिश्ते के लिए
ये वक्त इम्तिहान ले रहा है मेरे लिए तुम्हारी मोह्बत का और तुम्हारे लिए मेरी मोह्बत का
मन में शंका कुशंका का दौर चल रहा है
पर इस सब विचारो के द्वंदों के बीच भी एक अटल विश्वास कायम है
हमारी मोह्बत वक्त की सारी कसौटीयो पर खरा उतरेगा
और दुनिया में मोह्बत की एक नयी मिसाल देगी
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